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‘असली TMC’ का बड़ा दावा, कोलकाता बैठक में अभिषेक बनर्जी को पार्टी से सस्पेंड करने का फैसला

Kolkata कोलकाता : सोमवार को एक राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जिसमें खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) बताने वाले गुट ने बड़ा दावा करते हुए अभिषेक बनर्जी को पार्टी से सस्पेंड करने की घोषणा की है। यह निर्णय विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में आयोजित एक विशेष बैठक में लिया गया।
कोलकाता के एक निजी होटल में यह खास बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन से जुड़े कुछ नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में जावेद खान, बिप्लब कित्रा और संदीपन साहा सहित रिताब्रता बनर्जी शामिल रहे, जिन्हें इस गुट में जनरल सेक्रेटरी के रूप में बताया गया है।
बैठक के दौरान राजनीतिक रूप से कई अहम फैसले लिए जाने का दावा किया गया, जिनमें सबसे प्रमुख फैसला अभिषेक बनर्जी को संगठन से सस्पेंड करने का बताया गया। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय किस कानूनी या संगठनात्मक अधिकार के तहत लिया गया, इस पर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
इस बैठक की एक खास बात यह रही कि वहां पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह का उपयोग किया गया, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि यह गुट तृणमूल कांग्रेस का ही प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, बैठक स्थल पर TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें मौजूद नहीं थीं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम संगठन के भीतर गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर चल रही आंतरिक खींचतान को और उजागर करता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस ‘असली TMC’ गुट की संगठनात्मक स्थिति क्या है और इसका आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस से कितना संबंध है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में शामिल नेताओं ने संगठन के पुनर्गठन और नेतृत्व संरचना में बदलाव को लेकर भी चर्चा की। दावा किया गया कि पार्टी को “मूल सिद्धांतों” की ओर वापस लाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक पक्ष से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई पुष्टि नहीं की गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे एक समानांतर संगठनात्मक दावा माना जा रहा है, जो वास्तविक पार्टी संरचना से अलग है।
कोलकाता की इस बैठक के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए इसके पीछे की राजनीतिक रणनीति और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले भी ऐसे कई गुटीय दावे और समानांतर संगठनात्मक गतिविधियां सामने आती रही हैं, लेकिन इनकी वैधता और प्रभाव अक्सर सीमित ही रहा है।
फिलहाल, इस कथित ‘असली TMC’ द्वारा लिए गए निर्णय को लेकर राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि अभिषेक बनर्जी पर लगाए गए सस्पेंशन के दावे का वास्तविक संगठनात्मक आधार क्या है।
राजनीतिक हलकों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज है और आने वाले दिनों में इस पर आधिकारिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





